Saturday , 27 May 2017
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999 रू. में मिल रही थी सेक्स क्लब की मेंबरशिप

मुंबई। अलग-अलग कंपनियां अपने प्रॉडक्ट को बेचने के लिए मेंबरशिप स्कीम निकालती हैं, पर अपनी तरह के संभवत: पहले केस में हजारों लोगों का उन फ्रेंडशिप क्लबों के नाम पर रजिस्ट्रेशन करवाया गया, जिनकी आड़ में लड़कियों-मॉडल्स के साथ घूमने और उनके साथ सेक्स का लालच दिया जाता था।
इस संबंध में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। डीसीपी अखिलेश सिंह के अनुसार, पकड़े गए आरोपियों के पास से 300 से ज्यादा सिम कार्ड, 37 मोबाइल फोन, 3 लैपटॉप और 16 हार्ड डिस्क जब्त की गई हैं।
आरोपियों ने तीन अलग-अलग वेबसाइट्स बनाई थीं। वेबसाइट्स के नाम इस तरह के रखे गए थे कि लोग तुरंत ट्रैप में आ जाते थे और वेबसाइट्स को ओपन कर लेते थे। वहां उन्हें अलग-अलग लड़कियों के फोटो दिखते थे। वेबसाइट्स पर युवकों से 999 रूपये में रजिस्ट्रेशन करवाने को कहा जाता था और यह रकम ऑनलाइन पेटीएम में ट्रांसफर करने की हिदायत दी जाती थी। इसके लिए बाकायदा पेटीएम नंबर दिया जाता था। रजिस्ट्रेशन करवाने वाले को अपना मोबाइल नंबर भी देना पड़ता था।
नंबर देने वाला मानकर चलता था कि उसके पास लड़कियों के फ्रेंडशिप के कॉल्स आएंगे। कई लोगों को कॉल्स आए तो, पर लड़कियों के नहीं, बल्कि वेबसाइट्स से जुड़े लोगों के। वे कुछ लड़कियों या मॉडल्स के उन्हें फोटो भेजते थे और फिर मेंबरशिप लेने वालों को इनके साथ घूमने के अलग-अलग रेट बताते थे। काफी मामलों में सिर्फ रजिस्ट्रेशन किया गया, उसके बाद रजिस्ट्रेशन करवाने वाले से कोई संपर्क ही नहीं किया गया। उन्हें किसी भी लड़की या मॉडल्स से मिलवाया ही नहीं गया, पर रजिस्ट्रेशन के बहाने आरोपियों ने लाखों रूपये जमा कर लिए।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि पिछले करीब दो महीने में मोहम्मद शकील, गिरीश जायसवाल, कमल विश्वकर्मा, अर्जुन कनौजिया और शरीफ खान नामक आरोपियों के इस ग्रुप ने करीब 2000 लोगों का मेंबरशिप के बहाने रजिस्ट्रेशन करवाया था और करीब 20 लाख रूपये जमा कर लिए थे।
सीनियर इंस्पेक्टर नीता फडके, उमेश गौंड, दशरथ विटकर और शैलेश पवार द्वारा की गई जांच में सामने आया कि पेटीएम में अधिकतम रकम रखने की भी एक सीमा होती है। इसलिए जब किसी पेटीएम अकाउंट में रकम उस सीमा तक जमा हो जाती थी, तो आरोपी एक खास जूलर के पेटीएम अकाउंट में यह रकम ट्रांसफर कर देते थे और बदले में अपने आदमी उसकी जूलरी दुकान पर भेजकर उससे गोल्ड क्वॉइंस ले लेते थे। बाद में वह पेटीएम अकाउंट बंद कर दिया जाता था। फिर दूसरा, तीसरा और इसी तरह दर्जनों-सैकड़ों पेटीएम अकाउंट्स खुलते-बंद होते रहते थे और जूलर से गोल्ड क्वॉइंस खरीदने का सिलसिला भी चलता रहता था।
पेटीएम में अकाउंट खोलने के लिए सिम कार्ड की जरूरत होती है। सिम कार्ड खरीदने के लिए दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। इसके लिए आरोपियों ने कुछ प्लेसमेंट एजेंसियों से संपर्क कर रखा था, जहां नौकरी की इच्छा रखने वालों से उनके बॉयोडाटा के साथ उनका पैन कार्ड और आधार कार्ड नंबर भी मांगा जाता था। इन्हीं पैन कार्ड और आधार कार्ड नंबर को देकर फर्जी नाम से सिम कार्ड खरीदे जाते थे और फिर सिम कार्ड मिलते ही पेटीएम अकाउंट्स तो खुलते ही थे, मेंबरशिप का रजिट्रेशन कराए लोगों से सेक्स के नाम पर और भी मोटी रकम ऐंठी जाती थी।
एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, गिरफ्तार पांच आरोपियों में से एक आरोपी खुद कभी विक्टिम रहा है। उससे एक बार मेंबरशिप का रजिट्रेशन के बहाने दो हजार रूपये ठग लिए गए। सेक्स के नाम पर हुई इस ठगी की पुलिस में शिकायत करने में उसे संकोच हुआ। बाद में उसने सोचा कि उसकी तरह और भी लोग पुलिस में जाने से संकोच करते होंगे। यहीं से उसने सोचा कि क्यों न वह खुद इस तरह की ठगी करे। इस तरह उसने तीन फ्रेंडशिप क्लब के बहाने तीन सेक्स वेबसाइट्स बना लीं और सिर्फ दो ही महीनों में लाखों रूपये कमा लिए।

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