‘मैं राहत सामग्री तो नहीं बांट सकता लेकिन लॉक डॉउन से खड़ी गाडिय़ों की पार्किंग नहीं लूंगा’

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उदियापोल पार्किंग पर है गाड़ी रख कर गए स्थानीय लोग लॉकडाउन के कारण विभिन्न शहरों में फंसे : पार्किंग शुल्क 24 घंटे के है 20 रूपए, ठेकेदार ने कहा –

उदयपुर। कोरोना महामारी में जहां एक ओर कई दानदाता जरूरतमंदों के साथ-साथ कच्ची बस्तियों में जाकर राहत सामग्री दे रहे है और फोटो भी खींचवा रहे है ऐसे में उदियापोल बस स्टेण्ड पार्किंग वाले ने एक नई पहल की है और उसने स्पष्ट रूप से कहा कि लॉक डॉउन के दिन से जो भी गाड़ी उसके वहां पर पार्किंग मेें खड़ी उससे वह एक रूपया नहीं लेगा।
पार्किंग वाले का कहना है कि ‘मैं दूसरे दानदाताओं की तरह राहत सामग्री तो नहीं बांट सकता, लेकिन पार्किंग शुल्क ना लेकर मैं भी इतनी सेवा तो कर ही सकता हूँ।Ó
उदियापोल स्थित रोड़वेज के बस स्टेण्ड पर शहर के आस-पास के विभिन्न गांवों और उपखण्डों पर काम करने वाले कार्मिक अपने दुपहिया वाहनों को बस स्टेण्ड पर बनी पार्किेग में खड़ी कर जाते है और शाम को पुन: आकर निर्धारित दिनभर का पार्किंग शुल्क देकर वाहन लेकर जाते है, लेकिन 22 मार्च को जनता कफ्र्यू था और 23 से प्रदेश में लॉक डॉउन की घोषणा कर दी गई और बाद में प्रधानमंत्री ने इस लॉक डॉउन को 15 अप्रैल तक कर दिया। इधर पार्किंग में दर्जनों की संख्या में दुपहिया वाहन खड़े है, जिनका प्रतिदिन के हिसाब से शुल्क बढ़ रहा है। उदियापोल रोड़वेज बस स्टेण्ड पर पार्किंग का ठेका रतन पारिक का है और यहां पर वर्तमान में कालूराम अहारी पार्किंग का काम संभाल रहा हे।
जब पार्किंग का काम संभाल रहे खेरवाड़ा हाल पुलिस लाईन निवासी कालूराम से बात की तो उसने बताया कि अभी पार्किंग में 50 से 80 गाडिय़ां खड़ी है, जो लॉक डाउने के समय से ही खड़ी है। इनके शुल्क के बारे में पूछा तो कालूराम ने बताया कि वो किसी भी गाड़ी का पार्किंग शुल्क नहीं लेगा।
इसका कारण पूछने पर कालूराम ने बताया कि देश में कोरोनो महामारी को लेकर सरकारें कई प्रयास कर रहे है। वहीं कई दानदाता अपनी ओर से मदद कर रह है, कोई राशन सामग्री बांट रहा है तो कोई भोजन पैकेट बांट रहा है। कालूराम ने कहा कि मैं इतना सक्षम तो नहीं लेकिन यह मेरा फर्ज है कि लॉक डॉउन के दिन से खड़े वाहनों का मेँ पार्किंग शुल्क नहीं लूंगा। इस पर उसे होने वाले नुकसान के बारें पूछने पर कालूराम ने बताया कि मैं मुसीबत के दौर में इतनी तो मदद कर रही सकता हूँ। कालूराम अहारी ने अपनी ओर से छोटा सा एक सहयोग दिया है।

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