शहर मेें खत्म नहीं हो रही जरूरते

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गांवों को नहीं सरकारी मदद की दरकार
गांवों में भेजे अधिकांश किट अभी तक शेष है, उल्टा ग्रामीण दे रहे गेहँू

उदयपुर। कोरोना वायरस को लेकर लॉक डॉउन मेें शहर और गांव के जरूरतमंदों में जमीन-आसमान का फर्क नजर आ रहा है। सरकारी तंत्र का अनुभव बता रहा है कि शहर में हजारों लोग मुफ्त में मिल रहे मुख्यमंत्री भोजन कीट के लिए मुहँ ताक रहे है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी स्थिति उलट है। ग्रामीण क्षेत्रों में ग्रामीण राशन कीट ले जाने के बजाए अपनी ओर से उल्टा पंचायतों में लाकर गेहूँ दे जा रहे है ताकि वो किसी अन्य के काम आ सकें। जिले के अधिकांश उपखण्ड क्षेत्रों में रसद विभाग की ओर से भेजे गए किट अभी भी जैसे के तैसे ही रखे हुए है, वहीं शहर में अब तक 3 हजार किट बांटे जा चुके है और इसके बाद भी लगातार डिमांड आ रही है।
कोरोना वायरस को लेकर हुए लॉक डॉउन में करीब एक सप्ताह से राज्य सरकार के निर्देश पर जिला प्रशासन और रसद विभाग द्वारा जरूरतमंदों को मुख्यमंत्री भोजन किट दिया जा रहा है। पिछले एक सप्ताह से की जा रही इस व्यवस्था में एक नई सच्चाई ही सामने आ रही है। जिला रसद अधिकारी ज्योति ककवानी ने बताया कि जिला प्रशासन के निर्देश पर रसद विभाग ने 10 हजार पैकेट तैयार किए थे। जैसे ही शहर में लोगों को यह पता चला कि प्रशासन की ओर से मुफ्त में ही भोजन कीट बांटे जा रहे है तो मांगने वालों की लाईन लग चुकी है और लगातार फोन-फोन पर आ रहे है और लोग अपनी स्थिति खराब बताते हुए भोजन कीट मांग रहे है। इस पर रसद विभाग की ओर से अब शहर में करीब 3 हजार से अधिक किटों का वितरण किया जा चुका है। इसके बाद भी लोगों की डिमांग कम नहीं हो रही है और लगातार भोजन किट मांगे जा रहे है।
जिला रसद अधिकारी ज्योति ककवानी ने बताया कि जिला प्रशासन के निदे्रश पर जिले के सभी उपखण्ड मुख्यालयों पर 1-1 हजार और झाडोल और कोटड़ा उपखण्ड मुख्यालयों पर एहतियात के तौर पर 1500-1500 कीट भेजे जा चुके है, लेकिन हैरत की बात यह है कि अब तक किसी भी उपखण्ड मुख्यालय से कोई अतिरिक्त किट के लिए डिमांड नहीं आई है।

ग्रामीण अंचल में आलम यह है कि गांवों में अभी गेहूँ की फसल कटाई कर गेहँू को निकालने का दौर चल रहा है। ऐसे में ग्रामीण अंचल में आलम यह है कि कई ग्र्रामीण अपने घरों से करीब 10-10 किलो गेहँू लेकर पंचायत पर पहुँच रहे है और वहां पर अपनी मर्जी से जमा करवा रहे है। इन ग्रामीणों का कहना है कि पहले वे अपने घर का गेहूँ खाएंगे और इसके बाद वे सरकार द्वारा दी जा रही राशन सामग्री का उपयोग करेंर्गे।
गांव के लोग कोरोना वायरस के इस दौर में अपनी समझदारी और देश के प्रति प्रेम की एक नजीर पेश कर रहे है, जबकि शहर में स्थिति उलट है। शहर में हालत यह है कि शहर के लोगों की मानसिकता यह हो गई कि वे बार-बार राशन के किट मांग रहे है ताकि अपने घर में
स्टोक कर सकें। जिला रसद अधिकारी का कहना है कि 3 हजार किट बांटे जा चुके है और अभी भी शहर में लगातार डिमांड जारी है।

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