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200 स्टॉक्स की जांचों में 300 करोड़ की छीजत पकड़ी

तो 8.4 हजार स्टॉक्स की जांच से क्या हाल होगा ?
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन वेरीफिकेशन सिस्टम में अब होगा सुधार

खान सचिव ने जीएसटी, पैन नंबर जोडऩे के दिए आदेशखान विभाग का ओएमएस सॉफ्टवेयर में हुए एंट्री घोटालों को दबाया

नगर संवाददाता . उदयपुर। प्रदेश में खान विभाग के 200 स्टॉक्स पर हाल ही धनतेरस से पहले मारे गए छापों और फील्ड वेरीफिकेशन के दौरान पकड़े गए भारी घोटालों में विभाग ने 300 करोड़ रुपए की राजस्व छीजत पकड़ी गई है। सवाल खान विभाग के सिस्टम पर यह खड़ा हो गया कि यदि विभाग ने प्रदेश में अपने सभी 8 हजार 400 से अधिक स्टॉक्स की जांच कर ली तो क्या हाल होंगे। इसका जवाब खुद खान के बड़े अफसरों तक के पास नहीं है। यह सब घोटाले विभाग के उस ओएमएस सॉफ्टवेयर में किए गए मनमाने प्रावधानों से हुए, जिनमें खान के मालिकों, ट्रेडरों, पार्टियों को अरबों के मिनरल की मनमानी और फर्जी एंट्रियां करने का लीगल प्लेटफॉर्म उपलब्ध करा दिया था। इस सॉफ्टवेयर में सुधार की जबरदस्त गुंजाइश है लेकिन डीएमजी गौरव गोयल के ट्रेनिंग पर चले जाने के बाद इसमें सुधार और कार्रवाई का कोई कदम नहीं उठाया जा सका है।
धनतेरस से पहले खान विभाग ने अपने अधिकारियों की लंबी चौड़ी अलग अलग टीमें बनाकर प्रदेश के सभी जिलों में बड़े 200 स्टॉक्स की अचानक जांचें और छापेमारी की थी। इन 200 मामलों में ही लगभग 300 करोड़ रुपए तक की राजस्व चोरी और घोटाले पकड़े जा चुके हैं। विभाग के पास इतना स्टाफ भी नहीं है कि वह प्रदेश में सभी 8 हजार 400 से अधिक स्टॉक्स का वेरीफिकेशन करवा सके। लेकिन विभाग का मानना है कि यदि इन सबकी जांच हो जाए तो परिणाम भयावह और चौंकाने वाले होंगे। इन स्टाक्स की जांच के लिए विभाग लंबी कार्ययोजना तब बनाएगा, जब खान निदेशक गौरव गोयल अपनी ट्रेनिंग पूरी करके मसूरी से उदयपुर लौट आएंगे।गड़बड़ सॉफ्टवेयर बना घोटाले करने का लाइसेंससूत्रों के अनुसार खान निदेशालय के विभाग के ओएमएस सॉफ्टवेयर को बनाते वक्त पूर्व के समय में कई तकनीकी गड़बडिय़ां जानबूझकर छोड़ी गई। क्योंकि ई-रवन्ना में जो विभाग मिनरल के डिस्पेच से लेकर उसे परिवहन करने वाले डेस्टीनेशन तक की ऑनलाइन जानकारी लेता है, वही विभाग अपने इस सबसे बड़े सॉफ्टवेयर में मिनरल डिस्पेच और डेस्टीनेशन के कॉलम को बंद करके बैठा था, जिससे पाटियों को पूरे प्रदेश में हजारों करोड़ रुपए कीमत के मिनरल को खुर्दबुर्द कर काली कमाई करने का एक तरह से बैक डोर एंट्री या लाइसेंस दे दिया गया। सॉफ्टवेयर में मिनरल कहां से कहां ले जाया जा रहा है, इसका मौजूद ऑप्शन ही बंद कर दिया गया। यही नहीं स्टॉक्स की लोकेशन के कॉलम आदि को भी बंद कर दिया। खुद पार्टियों को एसएसओ आईडी एक्टीवेट करने का अधिकार देते हुए उनके द्वारा ही स्व प्रमाणित एंट्री भरने के अधिकार दे दिए गए। जो एक तरह से बिल्ली को ही दूध की रखवाली जैसा हो गया।सॉफ्टवेयर की जानकारियों का सत्यापन नहींयही नहीं खान विभाग ने लंबे समय से सॉफ्टवेयर में पार्टियों द्वारा खुद ही की जा रही एंट्रियों की कहीं कोई जांच नहीं कराई। इससे साफ है कि चोर-चोर मौसेरे भाई वाला काम विभाग में चलाया जाता रहा है। इन एंट्रियों में से 200 स्थानों पर विभाग ने हाल ही पहली बार वेरिफिकेशन किया तो 300 करोड़ रुपए के राजस्व चोरी का खुलासा हुआ। इस तरह खान अधिकारियों ने जानबूझकर यह घोटाला होने दिया और सॉफ्टवेयर को चलाने का अधिकार भी एक ही आदमी को दे दिया, जो एक तरह से इसका मालिक भी बन बैठा। सॉफ्टवेयर चलाने वाले तकनीकी कर्मचारी कपिल लूणा से लेकर अन्य खनि अभियंताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी है। इसका इंचार्ज डीओआईटी के तहत एनालिस्ट कम प्रोग्रामर (उप निदेशक) रेंक का अधिकारी देखता है। जबकि विभाग का कहना है कि खान विभाग हजारों करोड़ रुपए की कमाई करता है, इसके हजारों मामले होते हैं। ऐसे में असंख्य तकनीकी काम भी बढ़ते हैं। इस लिहाज से यहां डिप्टी डायरेक्टर रेंक की पोस्ट होनी चाहिए जबकि एनालिस्ट कम प्रोग्रामर कपिल लूणा के भरोसे इस हजारों करोड़ की एंट्री वाले इस गड़बडिय़ों, घोटालों से भरे सॉफ्टवेयर को छोड़ दिया गया।खान सचिव ने दिए जीएसटी, पैन नंबर जोडऩे के आदेश
ओएमएस की गड़बडिय़ां सामने आने के बाद खान सचिव दिनेश कुमार ने खान उद्यमियों, स्टाकिस्ट आदि के जीएसटी नंबर, पैन नंबर तक की एंट्रियों को इसमें भरने का प्रावधान करने के आदेश दिए हैं। इसकी अब विभाग पालना करेगा। लेकिन सॉफ्टवेयर में हुई भारी गड़बडिय़ों और पुराने हिसाब की भी जांच करनी जरूरी हो गई है। क्योंकि इस सॉफ्टवेयर में 106 स्टॉक्स में कुल 211 करोड़ के मिनरल की फर्जी प्रविष्टियां और अधिक स्टॉक के घपले विभाग ने पकड़े हैं। ऑनलाइन आंकड़ों के अनुसार 34.67 करोड़ रुपए के राजस्व का प्रारंभिक तौर पर विभाग को नुकसान होना पाया गया है। निदेशालय के रजिस्टर्ड डीलर्स/स्टाकिस्टों विभाग के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पोर्टल पर 1 फरवरी 2018 से खुद ही ओपनिंग स्टॉक को प्रमाणित कर रहे थे। हालांकि खान निदेशालय ने इन गड़बडिय़ों के पाए जाने के बाद एनालिस्ट कम प्रोगामर (एसीपी) कपिल लूणा को हटाकर उसकी जगह आरएएस अधिकारी यानि एडीए को इसका नोडल इंचार्ज नियुक्त किया है लेकिन तमाम मामलों की सच्चाई पर से अभी पर्दा नहीं हटा है।

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