Saturday , 27 May 2017
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हाईकोर्ट जाएंगे, कलेक्ट्री पर प्रदर्शन करेंगे, हर घर से देंगे आर्थिक सहायता

उदयपुर। उदयसागर वैटलैण्ड में सैंकड़ों किसानों की हजारों बीघा जमीन के जाने के विरोध में रविवार को सूखा नाका क्षेत्र में 13 गांवों की विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया। इसमें निर्णय लिया गया कि इस आदेश के विरोध में किसान हाईकोर्ट की शरण में जाएंगे और कलेक्ट्री पर उग्र प्रदर्शन किया जाएगा। प्रभावित हो रहे प्रत्येक गांव में से प्रत्येक घर से 300-300 रूपए की आर्थिक सहायता संघर्ष समिति को दी जाएगी, ताकि कानूनी लड़ाई लड़ी जा सके। महापंचायत में भाजपा और कांग्रेस से जुड़े जनप्रतिनिधि भी उपस्थित थे, जिन्होंने किसानों के हित की बात कही।
झील को संरक्षित क्षेत्र में घोषित करने के साथ ही आस-पास के क्षेत्र को वैटलैण्ड में शामिल करने के बाद जो नियम कानून प्रदेश सरकार की ओर से लागू किए जा रहे हैं, उससे क्षेत्र में रहने वाले किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस क्षेत्र करीब एक दर्जन से अधिक गांव वैटलैण्ड की चपेट में आ रहे हैं और गांवों में सैंकड़ों किसानों की हजारों बीघा जमीन जा रही है। इसी के विरोध में किसान आंदोलन की राह पर है। इसी को लेकर प्रभावित हो रहे 13 गांवों की महापंचायत का रविवार को आयोजन किया गया। रविवार सुबह 10 बजे से मटून स्थित सूखानाका पुलिया के पास में आयोजित महापंचायत में 13 गांवों के सैंकड़ों की संख्या में किसान आए जिसमें किसानों ने प्रदेश सरकार के इस निर्णय की आलोचना की।
महापंचायत को सम्बोधित करते हुए उदयसागर बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष विमल भादविया ने कहा कि यदि सरकार द्वारा इस प्राधिकरण को वापस नहीं लिया गया कि ग्रामीणों द्वारा उग्र आंदोलन और प्रदर्शन किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने सरकार को तीन दिन की चेतावनी दी और तीन दिनों में कार्रवाई नहीं करने पर उग्र आंदोलन किया जाएगा। इसके साथ ही निर्णय लिया गया कि संघर्ष समिति प्रदेश सरकार के निर्णय के विरोध में 17 या 18 मई को राजस्थान उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी। बैठक के दौरान ही उच्च न्यायालय में जाने के लिए आने वाले खर्चे का मामला आया तो संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने सर्व सम्मति से 13 गांवों में प्रत्येक घर से 300-300 रूपए का आर्थिक सहयोग देने को कहा। इस पर सभी ने सहमति दी।
इसके साथ ही महामंत्री ओनारसिंह देवड़ा ने कहा कि ग्रामीणों और किसानों की जमीनों को संरक्षित नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि संघर्ष समिति में अगर पार्टियां साथ नहीं देती है तो किसान नेताओं को अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए। इसके लिए सभी किसान नेता तैयार है। सचिव प्रकाश ओबरावल ने बताया कि प्रशासन ने मनमाने मापदण्डों के आधार पर जमीन का सर्वेकर संरक्षित किया है, जो स्वीकार्य नहीं है। इसके साथ ही मटून सरपंच नवली डांगी ने बताया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री ने मिलने पर उचित आश्वासन दिया था कि प्राधिकरण को लागू नहीं किया जाएगा, इसके बाद भी उसे लागू कर दिया गया जिससे किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। महापंचायत को नजरसिंह देवड़ा, गेहरीलाल डांगी, गंगाराम डांगी, जगन्नाथ डांगी, शंकरलाल डांगी, माना डांगी सहित कई लोगों ने सम्बोधित किया। महापंचायत में किसानों के अलावा कलड़वास सरपंच हीरालाल डांगी, देबारी से किशोरसिंह, लकड़वास से जग्गुराम मीणा, छात्रसंघ अध्यक्ष मयूरध्वजसिंह, पूर्व उपसरपंच मदनलाल डांगी, शंकरलाल डांगी, गंगाराम डांगी सहित कई लोगों ने सम्बोधित किया।आपत्तियों का फार्म लगातार भरने का निर्णय
महापंचायत में वक्ताओं ने कहा कि न्यायालय में जाने के साथ ही प्रदेश सरकार की ओर से मांगी गई आपत्तियों के फार्म भी किसानों को लगातार भरकर आपत्ति दर्ज करवानी होगी। इस पर प्रदेश सरकार को सुनवाई करनी ही होगी।
तीन दिन बाद कलेक्ट्री पर प्रदर्शन
महापंचायत में निर्णय लिया गया कि तीन दिनों में कार्रवाई नहीं होती है तो जिला कलेक्ट्री पर उग्र प्रदर्शन किया जाएगा जिसमें महिलाएं, बच्चों के साथ-साथ बुजुर्ग भी शामिल होंगे। कलेक्ट्री पर उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।
महिलाएं भी हुई शामिल
इस महापंचायत को लेकर महिलाओं में भी खासा उत्साह था। इसी कारण इस महापंचायत में दर्जनों की संख्या महिलाओं ने भाग लिया। कुछ महिला नेताओं ने इसे सम्बोधित भी किया।
हाथों-हाथ अनशन पर बैठने वाले थे युवा
इधर, महापंचायत के दौरान कुछ युवा काफी आक्रोशित हो गए थे। महापंचायत में प्रशासनिक अधिकारियों के नहीं आने के कारण आवेश में आए युवक हाथों-हाथ ही अनशन पर बैठने वाले थे, परन्तु संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने समझाइश की और अनशन पर बैठने से रूकवाया।
अपनी ही पार्टी को कोसा भाजपा नेताओं ने
इस महापंचायत में अधिकांश किसान नेता भाजपा से संबंधित है और कुछ तो वर्तमान में सरपंच है तो कुछ पूर्व सरपंच रह चुके हैं। नेताओं ने इस महापंचायत में अपनी ही पार्टी की सरकार को जमकर कोसा और इस्तीफा तक देने के लिए कहा।

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