Monday , 27 January 2020
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‘स्वामीजी के कमरे में आज भी चेतना है’

प्रधानमंत्री ने कहा, आज फिर एक बार स्वामी विवेकानंद जी की जयंती के पावन पर्व पर पूज्य संतों के बीच बड़े मनोयोग से कुछ पल बिताने का सौभाग्य मिला। स्वामी विवेकानंद जिस कमरे में ठहरते थे, वहां एक आध्यात्मिक चेतना है। मैंने भी वहां समय बिताया। यह जीवन का अमूल्य समय था। ऐसा अनुभव हो रहा था कि पूज्य स्वामीजी हमें और कार्य करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, नई ऊर्जा भर रहे हैं। स्वामीजी कहते थे कि सबकुछ भूल जाओ और मां भारती की सेवा में जुट जाओ।’कोलकाता पोर्ट आध्यात्मिकता-आत्मनिर्भरता का प्रतीकÓमोदी ने कहा, कोलकाता पोर्ट ने भारत को विदेश राज से स्वराज पाते हुए देखा है। सत्याग्रह से लेकर स्वच्छाग्रह तक देश को बदलते देखा है। यह पोर्ट सिर्फ मालवाहकों का स्थान नहीं रहा, बल्कि दुनिया में छाप छोडऩे वाले लोगों के कदम भी इस पर पड़े। अनेक अवसरों पर महान लोगों ने यहीं से अपनी शुरूआत की। कोलकाता का यह पोर्ट अपनी आध्यात्मिक और आत्मनिर्भरता का जीता जागता प्रतीक है। जब यह पोर्ट 150वें साल में प्रवेश कर रहा है, तो इसे न्यू इंडिया के निर्माण का ऊर्जावान प्रतीक बनाना हमारा दायित्व है।
‘बंगाल का विकास हमारी प्राथमिकताÓ
मोदी ने कहा, आयुष्मान भारत योजना के तहत देश के 75 लाख गरीबों को मुफ्त इलाज मिल चुका है। आप कल्पना कर सकते हैं, जब गरीब बीमारी से जूझता है तो जीने की भी आस छोड़ देता है। जब गरीब को जीने का सहारा मिल जाता है तो उसके आशीर्वाद अनमोल होते हैं। आज मैं चैन की नींद सो पाता हूं, क्योंकि ऐसे गरीब परिवार लगातार आशीर्वाद बरसाते रहते हैं।
”देश के 8 करोड़ किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना से इतनी बड़ी मदद मिली, लेकिन बंगाल में यह लागू नहीं हुआ, क्योंकि पैसा सीधे किसान के खाते में जाता है। इसकी वजह से यहां सिंडिकेट को अब अपना कट नहीं मिलता। कट नहीं तो कोई योजना लागू नहीं। मैं हमेशा चाहूंगा कि गरीबों को मदद के लिए आयुष्मान भारत और किसान निधि का लाभ बंगाल के लोगों को मिले। अब यहां के लोगों को योजनाओं से वंचित कोई नहीं रख पाएगा। बंगाल के अनेक वीर बेटे बेटियों ने जिस गांव-गरीब के लिए आवाज उठाई, उनका विकास हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।ÓÓ
‘डॉ. मुखर्जी और बाबासाहेब ने जलसंसाधनों की अहमियत समझीÓ
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा, डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी और बाबासाहेब अंबेडकर दोनों ने स्वतंत्रता के लिए नई नई नीतियां दी थीं। नया विजन दिया था। डॉ मुखर्जी की बनाई पहली औद्योगिक नीति में देश के जल संसाधनों के उचित उपयोगों पर जोर दिया गया, तो बाबासाहेब ने देश की पहली जलसंसाधन नीति और श्रमिकों से जुड़े कानून के निर्माण को लेकर अपने अनुभव का प्रयोग किया। देश में नदी, डैम्स और पॉट्स का निर्माण तेजी से हो पाया तो इसका बड़ा श्रेय इन दोनों महान सपूतों को जाता है। इन दोनों ने देश के संसाधनों की शक्ति को समझा था, उसे देश की जरूरत के मुताबिक उपयोग करने पर जोर दिया था।
”कोलकाता में 1944 में वॉटर पॉलिसी को लेकर हुई कॉन्फ्रेंस में बाबासाहेब ने कहा था कि भारत की वॉटर पॉलिसी व्यापक होनी चाहिए। इसमें खेती, बिजली और वॉटरवेज का समावेश होना चाहिए। देश का दुर्भाग्य रहा कि दोनों के सरकार से हटने के बाद सरकारों ने उनके विचारों पर वैसा अमल नहीं किया, जैसा किया जाना था।ÓÓ

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