Friday , 26 May 2017
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साइबर कफ्र्यू में आंशिक ढील आमजन को नहीं मिली राहत

उदयपुर। सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणियों के बाद जिला प्रशासन द्वारा की गई नेटबंदी पर तीसरे दिन गुरूवार रात्रि को नौ बजे आंशिक राहत दी, लेकिन आम जनता की परेशानियां शुक्रवार दोपहर तीन बजे तक बरकरार रहेगी। तीन दिन से नेटबंदी की मार झेल रहे शहर के वाशिन्दों की परेशानी अभी बरकरार है लेकिन प्रशासन ने लीज लाईन और बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों व सरकारी कार्यालयों पर से रोक हटा दी है। हालांकि मोबाईल डाटा पूरी तरह से बंद रखा गया है।
जिला प्रशासन के आदेशों के बाद शहर में तीन दिनों से नेट बंद चल रहा है। जिससे शहर में एक तरह से साईबर कफ्र्यू लग गया था और शहरवासी बेहाल हो गए थे। वहीं जिला प्रशासन भी चुप्पी साधे बैठा रहा था। गुरूवार को शहरवासी काफी त्रस्त हो गए थे। इंटरनेट बंद होने पर कोई काम नहीं हो पा रहा था। लगातार शहरवासियों के आक्रोश को देखकर जिला कलेक्टर रोहित गुप्ता ने गुरूवार शाम को पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक ली और जिले में कानून व्यवस्था की समीक्षा की। जिले में शांति पाए जाने पर जिला कलेक्टर रोहित गुप्ता ने नेटबंदी को लेकर नए आदेश निकाले। जिसमें आंशिक रूप से राहत दी गई। जिला प्रशासन की ओर से निकाले गए आदेशों में जिन प्रतिष्ठानों के पास लीज लाईन है उन्हें नेटबंदी से मुक्त कर दिया। इसके साथ ही बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों और इंटरनेट के माध्यम से व्यापार करने वाले व्यवसाइयों को भी नेटबंदी से मुक्त कर दिया। जिला प्रशासन ने सरकारी प्रतिष्ठानों को भी नेटबंदी से मुक्त कर दिया।
तीन दिन बाद भले ही जिला प्रशासन ने नेट को लेकर आंशिक राहत दी है, परन्तु इस राहत से आमजनता को कोई लाभ नहीं होने वाला है। जिला प्रशासन ने मोबाईल नेट पर रोक बरकरार रखी है और सभी मोबाईल कंपनियों को आगामी आदेश तक मोबाईल डाटा बंद रखने के लिए निर्देशित किया गया है। ऐसे में किसी भी शहरवासी के मोबाईल पर नेट नहीं चलेगा और आमजन के लिए अभी भी साईबर कफ्र्यू के हालात बने रहेंगे। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार शुक्रवार दोपहर को एक बार फिर से स्थिति को लेकर अधिकारियों से चर्चा की जाएगी। दोपहर को 3 बजे बाद मोबाईल डाटा से भी रोक हटाई जा सकती है।इंटरनेट बंदी पर प्रशासन के खिलाफ वाद दायर
उदयपुर। जिला प्रशासन की ओर से तीन दिनों से बंद किए गए इंटरनेट के विरूद्ध जिला एवं सेशन न्यायालय में वाद पेश किया गया है और न्यायालय से जिला प्रशासन की ओर से जारी इन आदेशों को निरस्त करने का आग्रह किया है।
जिला मजिस्ट्रेट रोहित गुप्ता की ओर से एक आदेश जारी कर शहर और आस-पास के 11 थाना क्षेत्रों और सलूम्बर नगर पालिका क्षेत्र में नेट बंद कर दिया गया। इसके बाद से ही शहरवासी खासे परेशान हो गए है। एक शहरवासी छत्रपति पुत्र तेजसिंह सरूपरिया निवासी हॉस्पीटल रोड़ ने अधिवक्ता सुंदरलाल माण्डावत के माध्यम से जिला एवं सेशन न्यायालय में जिला प्रशासन के इन आदेशों के खिलाफ वाद पेश किया गया है।
वरिष्ठ अधिवक्ता माण्डावत ने बताया कि जिला मजिस्ट्रेट की ओर से जारी किए गए इन आदेशों से पहले ना तो कोई सार्वजनिक उद्घोषणा की गई और ना ही किसी प्रकार की सुनवाई का मौका दिया गया। ऐसे में इस तरह के आदेश जारी करना पूर्णरूप से गलत है। इन आदेशों से प्रधानमंत्री की डिजीटल इंडिया का नारा गलत हो रहा है।
प्रार्थी सरूपरिया बैंकिंग इंटरनेट व्यवसाय से जुड़ा हुआ है और इन आदेशों के कारण वह दैनिक जीवन यापन नहीं कर पा रहा है। प्रार्थी छत्रपति ने अपने अधिवक्ता के जरिए इन आदेशों पर स्थगित करते हुए निरस्त करने का आग्रह किया गया है। ऐसा नहीं करने पर उदयपुर की जनता को आजीविका चलाना मुश्किल हो जाएगा।समाचार पत्र और इंटरनेट का क्या संबंध : प्रभारी मंत्रीउदयपुर में विभिन्न विभागों की समीक्षा बैठक के लिए प्रभारी मंत्री धनसिंह रावत आए थे। प्रभारी मंत्री धनसिंह रावत से जब उदयपुर शहर में पिछले तीन दिनों से बंद इंटरनेट से समाचार पत्रों में हो रही परेशानियों के बारे में चर्चा की गई तो प्रभारी मंत्री ने कहा कि इंटरनेट के बंद होने से समाचार पत्र का क्या संबंध है !

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