Monday , 27 January 2020
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समझौते के लिए मांगी 3 लाख की रिश्वत

एक लाख लेते कांस्टेबल व हेड कांस्टेबल गिरफ्तार
भीलवाड़ा (प्रात:काल संवाददाता)। डीजीपी भूपेंद्र सिंह यादव के भीलवाड़ा में होने के बावजूद प्रताप नगर थाने के हेडकांस्टेबल व कांस्टेबल ने दो दिन में तीन लाख रूपए की रिश्वत लेने से गुरेज नहीं किया। यही नहीं, थाने में तीन दिन से धोखाधड़ी के एक मामले के आरोपियों को अवैध रूप से थाने में बैठाकर यह वसूली की गई।
एसीबी के एएसपी बृजराजसिंह चारण ने बताया कि एडवोकेट नवीन टांक ने 14 दिसंबर को एक शिकायत की कि उसके एक मित्र को बेवजह जयपुर से लाकर थाने में बैठा रखा है और तीन लाख रूपए की मांग कर रहे हैं। इस पर एसीबी ने शिकायत का सत्यापन किया। सत्यापन में ही दो लाख रूपए रिश्वत की राशि के शनिवार को ही थाने में ले लिए। बाकी एक लाख रूपए लेते रविवार को चित्तौडगढ़़ रोड स्थित होटल रेडियंट में कांस्टेबल ओमप्रकाश को रिश्वत राशि लेते दबोच लिया। प्रताप नगर थाने में मुकदमा नंबर 380/19 के मामले में यह राशि राजीनामा कराने के नाम पर ली गई थी। वहीं एसीबी की एक अन्य टीम ने मौके से कुछ समय पहले निकले हेडकांस्टेबल सहीराम को थाने से गिरफ्तार किया है। इस मामले के अनुसंधान अधिकारी थानाप्रभारी बताए गए हैं।तलाशी में नहीं मिला खास
एसीबी के एएसपी सौभाग्यसिंह ने प्रताप नगर थाने के कांस्टेबल ओमप्रकाश के मकान की तलाशी ली जबकि एसीबी ने थानाप्रभारी के क्वार्टर और सहीराम के शास्त्रीनगर स्थित आवास की भी तलाशी ली है लेकिन वहां कुछ भी नहीं मिला। सौभाग्यसिंह ने आरोपी के मकान की तलाशी भी ली है जहां कुछ नहीं मिला है।बदला स्थान
रिश्वत की राशि पहले कांची रिसोर्ट में देना तय हुआ था। परिवादी नवीन टांक से मिलने ओमप्रकाश और सहीराम कार से होटल पहुंचे और उन्होंने नीचे से ही फोन कर स्थान बदलते हुए होटल रेडियंट बुलवाया। पहले से वहां तैयार बैठी एसीबी टीम ने भी हार नहीं मानी और टांक को वहां अकेले ही भेजा। टांक जब होटल पहुंचे तो कांस्टेबल ओमप्रकाश को होटल में छोड़कर एसीबी टीम के पहुंचने से पहले ही सहीराम थाने के लिए रवाना हो गया। काफी देर बाद कांस्टेबल ओमप्रकाश ने रिश्वत की राशि ली। सूत्रों की मानें तो यहां भी खाकी वाले ने खाकी वाले के साथ धोखा किया। परिवादी ने ओमप्रकाश को लालच दिया कि वह उसे अलग से 25-50 हजार रूपए देगा और इसकी अन्य अधिकारियों को खबर भी नहीं होगी। जैसे ही ओमप्रकाश ने रिश्वत की राशि ली, एसीबी ने उसे दबोच लिया।यह था मामलाआजाद नगर के रहने वाले राकेश कुमार ने पिछले दिनों एक मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने मुकदमा नंबर 380/19, धारा 420 व 406, चिटफंड एक्ट के तहत दर्ज किया जिसमें कहा गया कि सवाईमाधोपुर के वजीरपुर निवासी शरीफ मोहम्मद सहित कुछ लोगों ने बिट कॉयन नामक फर्म के नाम से कंपनी चलाई जिसमें भीलवाड़ा व चित्तौडगढ़़ के लोगों से 50-50 हजार रूपए जमा कराए गए जिसमें कहा गया कि उन्हें 100 दिन तक 200 रूपए प्रतिदिन और तीन साल बाद तिगुने डेढ़ लाख रूपए मिलेंगे। लोगों को शुरू के 50 दिन तक तो 200-200 रूपए मिले फिर पैसा मिलना बंद हो गया। धोखाधड़ी के इस मामले की जांच थानाप्रभारी चैनाराम कर रहे थे। तीन दिन पहले थाने के एक सहायक उप निरीक्षक और पुलिसकर्मी जयपुर गए और शरीफ व अन्य दो लोगों को भीलवाड़ा ले आए। राजीनामेे के नाम पर पहले ढाई लाख और फिर तीन लाख में मामला तय हुआ। इस दौरान शरीफ ने अपने हाइकोर्ट के अधिवक्ता मित्र नवीन टांक को फोन कर 10 लाख रूपए लेकर भीलवाड़ा आने को कहा। अधिवक्ता नवीन ने भीलवाड़ा आकर पूरे मामले को समझा और बाद में एसीबी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बृजराजसिंह चारण के समक्ष परिवाद पेश किया।

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