Tuesday , 30 May 2017
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‘राम पर सवाल नहीं तो 3 तलाक पर क्यों’

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नई दिल्ली। तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान मंगलवार को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एआईएमपीएलबी के वकील कपिल सिब्बल ने अदालत के सामने कई दिलचस्प दलीलें पेश कीं। सिब्बल ने तीन तलाक को मुस्लिमों की आस्था का मुद्दा बताते हुए उसकी तुलना भगवान राम के अयोध्या में जन्म से कर डाली। उन्होंने कहा कि अगर भगवान राम के अयोध्या में जन्म लेने को लेकर हिंदुओं की आस्था पर सवाल नहीं उठाए जा सकते तो तीन तलाक पर सवाल क्यों? उन्होंने तीन तलाक अमान्य होने की स्थिति में नया कानून लाने के केंद्र के बयान पर भी सवाल उठाए।
कोर्ट में एआईएमपीएलबी का पक्ष रख रहे सिब्बल ने कहा, मुसलमान पिछले 1400 सालों से तीन तलाक की प्रथा का पालन कर रहे हैं और यह विश्वास का मामला है। आप कैसे कह सकते हैं कि यह असंवैधानिक है? आस्था का सवाल उठाते हुए सिब्बल ने आगे कहा, अगर हिंदू मानते हैं कि भगवान राम का जन्म अयोध्या में हुआ था तो इस आस्था को संवैधानिक मान्यता के आधार पर सवालों के घेरे में नहीं लाया जा सकता। सिब्बल ने कहा कि कोर्ट को किसी की आस्था और विश्वास को न तो तय करना चाहिए और न ही उसमें दखल देना चाहिए। इस पर जस्टिस आर. एफ नरीमन ने सिब्बल ने पूछा, क्या आप यह कहना चाहते हैं कि हमें इस मामले पर सुनवाई नहीं करनी चाहिए? जवाब में सिब्बल ने कहा, हां, आपको नहीं करनी चाहिए।
अपनी दलीलों को आगे बढ़ाते हुए सिब्बल ने कहा, अगर निकाह और तलाक दोनों कॉन्ट्रैक्ट हैं, तो दूसरों को इससे समस्या क्यों होनी चाहिए? खास तौर पर तब, जब इसका पालन 1400 सालों से किया जा रहा है। एआईएमपीएलबी की ओर से सिब्बल ने कोर्ट में यह भी कहा कि पर्सनल लॉ कुरान और हदीस से आया है, तो क्या अदालत कुरआन में लिखे लाखों शब्दों की व्याख्या करेगी? सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एआईएमपीएलबी से पूछा कि इस्लाम में वॉट्सऐप पर दिए गए ई-डिवॉर्स को लेकर स्थिति क्या है? इस पर सिब्बल ने बताया कि वाट्सऐप पर भी तलाक हुआ है और यह सुरक्षित है।

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