Monday , 27 January 2020
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‘युवा ही सीएए पर भ्रम दूर कर रहे’

आयुष्मान भारत और किसान सम्मान योजना लागू न करने पर मोदी का ममता पर तंज-नीति निर्धारकों को ईश्वर सद्बुद्धि दे
कोलकाता (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को बेलूर मठ में कहा कि नागरिकता कानून किसी की नागरिकता छीनेगा नहीं बल्कि देगा। गांधीजी मानते थे भारत को पाकिस्तान के धार्मिक अल्पसंख्यकों को सिटिजनशिप देनी चाहिए। इसके बाद मोदी ने कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट के 150वें साल में प्रवेश करने के कार्यक्रम का उद्घाटन किया। हालांकि, इसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नहीं पहुंचीं। मोदी ने कोलकाता पोर्ट को डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के नाम पर करने की भी घोषणा की।
मोदी ने यहां आयुष्मान भारत और पीएम किसान सम्मान योजना के पश्चिम बंगाल में लागू न करने को लेकर ममता सरकार पर तंज कसा। प्रधानमंत्री ने कहा कि मुझे नहीं पता कि राज्य सरकार आयुष्मान भारत योजना के लिए अनुमति दे देगी या नहीं, अगर ऐसा होता है तो लोगों को स्वास्थ्य योजनाओं से जुड़ा लाभ मिलने लगेगा। नीति निर्धारकों को ईश्वर सद्बुद्धि दे।
‘युवा ही सीएए पर भ्रम दूर कर रहेÓ : बेलूर मठ में मोदी ने कहा कि कुछ लोग सीएए को लेकर भ्रम फैला रहे हैं, मुझे खुशी है कि युवा ही उनका यह भ्रम दूर कर रहा है। पाकिस्तान में जिस तरह दूसरे धर्म के लोगों पर अत्याचार होता है, उसको लेकर हमारा युवा ही आवाज उठा रहा है। नागरिकता कानून में हम संशोधन न लाते, तो किसी को यह पता ही न चलता कि पाकिस्तान में कैसे मानवाधिकार का हनन हुआ है। कैसे बहन-बेटियों के अधिकारों को खत्म किया गया है।
”हमारी संस्कृति और संविधान यही अपेक्षा करता है कि नागरिक के तौर पर हम अपने दायित्वों को पूरी ईमानदारी और समर्पण से निभाएं। आजादी के 70 साल बाद हमने अधिकार अधिकार लिए, लेकिन अब हर भारतीय का कर्तव्य भी उतना ही महत्वपूर्ण होना चाहिए।ÓÓ
‘सीएए पर कुछ अब भी अफवाहों का शिकारÓ : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता के बेलूर मठ से इस कानून को लेकर केंद्र सरकार का रूख स्पष्ट किया और बिना नाम लिए ममता बनर्जी सहित विपक्षी नेताओं पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि यह कानून नागरिकता देने के लिए है, न कि लेने के लिए। इस कानून को रातों-रात नहीं बल्कि सोच विचार कर बनाया गया है, लेकिन कुछ राजनीतिक दल इसे जानबूझकर समझना नहीं चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इस कानून के बन जाने के बाद अब पाकिस्तान को जवाब देना होगा कि उसने अल्पसंख्यकों पर जुर्म क्यों किया।
बेलूर मठ को अपना ‘घरÓ बताते हुए प्र.म. मोदी ने कहा, नागरिकता संशोधन कानून को लेकर युवाओं में बड़ी चर्चा है। बहुत से सवाल युवाओं के मन में भर दिए गए हैं। बहुत से युवा अफवाहों के शिकार हुए हैं। ऐसे युवाओं को समझाना और संतुष्ट करना हम सबकी जिम्मेदारी है। राष्ट्रीय युवा दिवस पर देश और पश्चिम बंगाल और नॉर्थ ईस्ट के युवाओं से इस पवित्र भूमि से कहना चाहता हूं कि नागरिकता देने के लिए हमने कोई रातों-रात कानून नहीं बनाया है।

बेलूर मठ की स्थापना स्वामी विवेकानंद ने 1 मई 1897 में की थीबता दें कि हावड़ा जिले के बेलूर में स्थित इस मठ की स्थापना स्वामी विवेकानंद ने 1 मई 1897 में की थी। इस मठ को बनाने का उद्देश्य उन साधुओं-संन्यासियों को संगठित करना था जो रामकृष्ण परमहंस की शिक्षाओं में गहरी आस्था रखते थे। इन साधुओं और संन्यासियों का काम था कि वह रामकृष्ण परमहंस के उपदेशों को जनसाधारण तक पहुंचाए और गरीब, दुखी और कमजोर लोगों की नि:स्वार्थ भाव से सेवा कर सकें। इस मठ में स्वामी विवेकानंद और उनके गुरू रामकृष्ण परमहंस की स्मृति संजो कर रखी गई है।

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