Wednesday , 11 December 2019
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महाराष्ट्र में उलटफेर

पहले भी चौंकाती रही है देश की सियासत
मुंबई (कार्यालय संवाददाता)। महाराष्ट्र में रातोंरात सियासी तस्वीर बदल गई। राजनीतिक पंडितों को चौंकाते हुए शनिवार सुबह भाजपा ने एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बना ली। देवेंद्र फडणवीस एक बार फिर सीएम बन गए। पर, देश की सियासत में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। पहले भी कई ऐसे मौके आए हैं, जब सियासत की तस्वीर अचानक इस तरह बदली, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी।
..जब एक वोट से गिर गई थी अटलजी की सरकार
1998 में एनडीए गठबंधन से अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री बने थे लेकिन 13 महीने में ही सरकार गिर गई। दरअसल, अन्नाद्रमुक प्रमुख जयललिता लगातार सरकार से कुछ मांगें कर रही थीं। उस वक्त तमिलनाडु में डीएमके की सरकार थी और एम करूणानिधि मुख्यमंत्री थे। जयललिता तमिलनाडु सरकार को बर्खास्त करने की मांग कर रही थीं। जयललिता ने ऐसा न करने पर एनडीए से समर्थन वापस ले लिया और भाजपा को सदन में अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा।
17 अप्रैल 1999 को लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर बहस हुई लेकिन इससे पहले बसपा की नेता मायावती ने वोटिंग में हिस्सा न लेने का फैसला किया। फिर थोड़ी ही देर में उन्होंने अपना फैसला बदल दिया और एनडीए के विरोध में वोट कर दिया। अब सदन की निगाहें कोरापुट से सांसद गिरधर गोमांग पर थीं। दो महीने पहले ही गोमांग ओडिशा के मुख्यमंत्री बने थे। ऐसे में छह महीने के भीतर उन्हें ओडिशा में विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य चुना जाना था लेकिन अभी उन्होंने लोकसभा से इस्तीफा नहीं दिया था। गोमांग ने भाजपा सरकार के विश्वास प्रस्ताव के विरोध में वोट कर दिया। भाजपा सरकार के पक्ष में 269 वोट पड़े थे और विरोध में 270 वोट पड़े थे।
एक दिन के लिए यूपी के सीएम बने थे जगदंबिका पाल
1998 में यूपी की सियासत में ऐसा ही एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला था, जब सिर्फ एक दिन के लिए ही जगदंबिका पाल सीएम बने थे। अगले ही दिन उन्हें अपनी कुर्सी छोडऩी पड़ गई थी। हुआ यूं कि 21-22 फरवरी 1998 की रात यूपी के गवर्नर रोमेश भंडारी ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश की। पर, लेकिन केंद्र ने इसे ठुकरा दिया। भाजपा के मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने बाहरी विधायकों को साथ लेकर सरकार का गठन किया। पर, विपक्ष ने इसका विरोध किया। भंडारी ने ऐतराज जताया और सरकार को बर्खास्त करने का निर्णय किया। इसके बाद उन्होंने जगदंबिका पाल को सरकार बनाने का मौका मिला। पर, उनकी सरकार एक दिन भी नहीं टिक पाई। पूर्व प्र.म. अटल बिहारी वाजपेयी इस फैसले के खिलाफ धरने पर बैठ गए और कल्याण सिंह के समर्थक मामले को हाई कोर्ट लेकर गए। हाई कोर्ट ने गवर्नर के फैसले पर रोक लगा दी और फिर कल्याण सिंह दोबारा सीएम बन गए।
मांझी को हटाकर दोबारा सीएम बने नीतीश
2014 आम चुनाव में नीतीश कुमार को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। नैतिकता का हवाला देते हुए नीतीश ने सीएम की कुर्सी छोड़ दी। इसके बाद, महादलित समुदाय से ताल्लुक रखने वाले जीतनराम मांझी को अपना उत्तराधिकारी चुना। हालांकि, नीतीश की यह दरियादिली ज्यादा दिन तक कायम नहीं रही। मांझी से उनके मतभेद उभरे। इसके बाद, मांझी को जबरन कुर्सी से हटाकर नीतीश एक बार फिर सीएम बन गए। इस बार उनका कार्यकाल 22 फरवरी 2015 से लेकर 19 नवंबर 2015 तक रहा।
…और बड़े उलटफेर के साथ फिर सीएम बने येदियुरप्पा
2018 के कर्नाटक विधानसभा के नतीजों के बाद भाजपा 104 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। बीएस येदियुरप्पा ने 17 मई 2018 को सीएम पद की शपथ ली और दावा किया कि उनके पास बहुमत का आंकड़ा है। मगर 19 मई को बहुमत परीक्षण से ठीक पहले इस्तीफा दे दिया। इसके बाद कांग्रेस और जेडीएस ने गठबंधन कर एच. डी. कुमारस्वामी के नेतृत्व में सरकार का गठन किया, जो 14 महीने ही चल पाई। इसके बाद येदियुरप्पा फिर सीएम बने।

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