Wednesday , 20 November 2019
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भारत-म्यांमार-थाईलैंड हाईवे शुरू होने से कारोबार बढ़ेगा

बैंकॉक (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को तीन दिवसीय दौरे पर थाईलैंड पहुंचे। बैंकॉक के निमिबुत्र स्टेडियम में ‘स्वस्दी पीएम मोदी’ कार्यक्रम में भारतीय समुदाय को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि थाईलैंड के कण-कण और जन-जन में अपनापन नजर आता है। ये रिश्ते दिल, आत्म, आस्था और अध्यात्म के हैं। भारत का नाम पौराणिक काल के जम्बूद्वीप से जुड़ा है। वहीं थाईलैंड स्वर्णभूमि का हिस्सा था। भगवान राम की मर्यादा और बुद्ध की करूणा हमारी साझी विरासत है। नॉर्थ ईस्ट इंडिया एशिया का गेटवे बन रहा है, भारत-म्यांमार-थाईलैंड हाईवे शुरू होने से कारोबार बढ़ेगा। मोदी ने गुरू नानक देवजी की 550वीं जयंती के मौके पर सिक्का और तमिल ग्रंथ तिरुक्कुल का थाई अनुवाद भी जारी किया।
मोदी ने भारतीयों से कहा- आप ने इस स्वर्णभूमि को भी अपने रंग से रंग दिया। थाईलैंड के कण-कण में अपनापन नजर आता है। यहां पूर्वांचल से काफी लोग आए और आज पूर्वी भारत में सूर्यदेव और छठी मैया की उपासना का महापर्व मनाया जा रहा है। सभी साथियों को छठ पूजा की शुभकामनाएं देता हूं। थाईलैंड की यह मेरी पहली आधिकारिक यात्रा है। पिछली बार 3 साल पहले थाईलैंड के राजा को यहां रू-ब-रू आकर श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
आज मैं थाई प्रधानमंत्री के न्योते पर भारतीय आसियान समिट में भाग लेने आया हूं। साथियों थाईलैंड के राजपरिवार का भारत के प्रति लगाव हमारे घनिष्ठ संबंधों का प्रतीक है। महारानी खुद संस्कृत की बड़ी विद्वान हैं। संस्कृति में उनकी गहरी रूचि है। भारत के साथ नाता और परिचय बहुत व्यापक है। भारत ने उनके प्रति पद्मभूषण से अपना आभार व्यक्त किया है।
हम नॉर्थ ईस्ट इंडिया को साउथ ईस्ट एशिया के गेटवे के तौर पर विकसित कर रहे हैं। इससे भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी और थाइलैंड की एक्ट वेस्ट पॉलिसी को ताकत मिलेगी। एक बार भारत-म्यांमार-थाईलैंड हाईवे शुरू हो जाएगा, तो तीनों देशों के बीच कनेक्टिविटी आसान होगी, व्यापार बढ़ेगा और ट्रेडिशन को भी नई ताकत मिलेगी।
‘आदिकाल में थाईलैंड स्वर्णभूमि का हिस्सा था’ : मोदी ने कहा- थाईलैंड के साथ हमारे रिश्तों में इतनी आत्मीयता आई कैसे। यह आपसी विश्वास, घुलमिल कर रहना, यह आए कहां से? इसका सीधा सा जवाब है। दरअसल, हमारे रिश्ते सिर्फ सरकारों के बीच के नहीं हैं। हकीकत यह है कि इतिहास के हर पल ने संबंधों को गहरा किया है। ये रिश्ते दिल, आत्म, आस्था और अध्यात्म के हैं। भारत का नाम पौराणिक काल के जम्बूद्वीप से जुड़ा है। वहीं थाईलैंड स्वर्णभूमि का हिस्सा था।
भारत और थाईलैंड का जुड़ाव हजारों साल पुराना है। भारत के दक्षिण, पूर्वी और पश्चिमी तट हजारों साल पहले दक्षिण पूर्वी एशिया के साथ समुंदर के रास्ते से जुड़े। हमारे नाविकों ने तब समुद्र की लहरों पर हजारों मील का रास्ता तय कर समृद्धि के जो रास्ते बनाए (शेष पेज 8 पर)

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