Tuesday , 30 May 2017
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नोटबंदी से रिवर्स गियर में वाहन उद्योग

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carsनई दिल्ली। नोटबंदी की मार ने गत दिसंबर महीने में वाहन उद्योग की कमर बुरी तरह तोड़ दी और घरेलू बाजार में वाहनों की बिक्री में सदी की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गयी।
वाहन निर्माता कंपनियों के संगठन सियाम द्वारा मंगलवार को यहां जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में सभी श्रेणी के सभी वाहनों की कुल बिक्री 18.66 प्रतिशत घटकर 12,21,929 इकाई रह गयी। दिसंबर 2015 में यह आंकड़ा 15,02,314 इकाई था। यह दिसंबर 2000 के बाद की सबसे तेज गिरावट है।
नोटबंदी के कारण पिछले साल नवंबर में भी वाहनों की बिक्री 5.48 प्रतिशत गिरी थी।
सियाम के महानिदेशक विष्णु माथुर ने आंकड़े जारी करते हुये कहा, ऑटो उद्योग पर (नोटबंदी की) बुरी मार पड़ी है। यदि बजट में अर्थव्यवस्था को गति देने, उपभोग तथा लोगों की व्यय योग्य आय बढ़ाने के उपाय नहीं किये गये तो हम चालू वित्त वर्ष के अपने बिक्री के पूर्वानुमान को हासिल नहीं कर पायेंगे।
गत दिसंबर में सभी श्रेणियों में गिरावट देखी गयी। यात्री कारों की बिक्री 8.14 प्रतिशत घटी जो अप्रैल 2014 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है। यह दिसंबर 2015 के 1,72,671 से घटकर 1,58,817 इकाई रह गयी। कारों, उपयोगी वाहनों तथा वैनों समेत यात्री वाहनों की कुल बिक्री में 1.36 प्रतिशत की कमी दर्ज की गयी जो अक्टूबर 2014 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है। इसमें उपयोगी वाहनों की बिक्री में हालांकि 29.94 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गयी और यह 58,309 इकाई रही।
दुपहिया वाहनों की बिक्री में अब तक की रिकॉर्ड गिरावट देखी गयी। यह 22.04 प्रतिशत घटकर 9,10,235 इकाई रह गयी। सियाम ने वित्त वर्ष 1997-98 से वाहनों की बिक्री के आंकड़े रखने शुरू किये हैं और तब से इतनी बड़ी गिरावट पहले कभी नहीं देखी गयी। स्कूटरों की बिक्री में मार्च 2001 के बाद की सबसे बड़ी 26.38 प्रतिशत की गिरावट रही और यह घटकर 2,84,384 इकाई पर आ गयी। मोटरसाइकिलों की बिक्री भी 22.50 प्रतिशत घटकर 5,61,690 इकाई रह गयी जो दिसंबर 2008 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है।

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