Sunday , 20 October 2019
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..तो धोनी को ‘संन्यास’ देने की तैयारी !

क्यों धोनी को लेना चाहिए संन्यास ?
भारतीय क्रिकेट में अहम स्थान रखने वाले एक पूर्व खिलाड़ी ने कहा, मुझे विश्वास है कि धोनी फिर से भारत के लिए नहीं चुने जाएंगे। यह सबसे अच्छा समय है जब वह क्रिकेट को अलविदा कह दें। यही नहीं, उन्होंने कहा कि वास्तव में, मुझे लगता है कि विराट कोहली की कप्तानी की भी समीक्षा की जा सकती है। यह अभियान किसी भी मानकों से सफल नहीं था। उनकी जवाबदेही तो बनती ही है। बता दें कि धोनी ने 350 वनडे में 50.57 की औसत से 10,773 रन बनाए हैं, जबकि 98 इंटरनेशनल टी-20 में 37.60 की औसत से 1617 रन बनाए हैं।लंदन (एजेंसी)। वल्र्ड कप सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड से भारत की हार के बाद महेंद्र सिंह धोनी का क्रिकेट करियर खत्म होना तय माना जा रहा है। सिलेक्टरों ने इस बात का कड़ा संकेत दिया है कि अगर टीम इंडिया को 2011 में वल्र्ड चैंपियन बनाने वाले धोनी रिटायरमेंट नहीं लेते हैं, तो शायद ही वह टीम इंडिया के लिए कभी खेल सकें। इस बारे में चीफ सिलेक्टर एमएसके प्रसाद जल्द ही धोनी से बात भी करने वाले हैं।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, मुख्य चयनकर्ता प्रसाद जल्द ही धोनी से बात करेंगे। ऐसा तब होगा जब धोनी अगर पहले ही अपने फैसले के बारे में प्रसाद को जानकारी नहीं देते। सूत्र ने बताया कि मुझे नहीं लगता है कि वह सिलेक्टरों के टी20 वल्र्ड कप-2020 के प्लान का हिस्सा हैं। उन्हें सम्मान के साथ इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कहना चाहिए। अब वह कभी वह लय हासिल नहीं कर सकते, जो कभी हुआ करते थे।
धोनी अब नहीं रहे फिनिशर : सूत्रों ने कहा कहा, ऋषभ पंत जैसे युवा क्रिकेटर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। वहीं धोनी अब पहले जैसे फिनिशर नहीं रहे। 6 या 7 नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरते हैं तो संघर्ष करते दिखाई देते हैं। यह टीम को नुकसान पहुंचा रहा है। बता दें कि न्यूजीलैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में धोनी की पारी धीमी रही थी और आखिरी ओवरों में जब गेंद की तुलना में अधिक रन चाहिए थे तो वह आउट हो गए और भारत 18 रन से हार गया।
रिटायरमेंट पर कभी बात नहीं हुई : रोचक बात यह है कि वल्र्ड कप के बाद रिटायरमेंट लेने जैसे मुद्दों पर कभी सिलेक्टर्स और धोनी के बीच बात हुई ही नहीं। इस बारे में सूत्र ने बताया कि हम नहीं चाहते थे कि धोनी का ध्यान भटके। हम चाहते थे कि धोनी अपना पूरा ध्यान वल्र्ड कप पर लगाएं और उसे देश लाएं। लेकिन, अब समय बदल गया है। ऐसा कुछ नहीं है, जिसे उन्होंने पाया ना हो और ना ही उन्हें इंटरनेशनल लेवल पर साबित करने की जरूरत है।
वॉ का क्या था कहना? : इस बारे में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव वॉ का मानना है कि उनके देश में बड़े सितारों को बाहर करने के लिए सर्वश्रेष्ठ चरणबद्ध नीति है जबकि उप महाद्वीप में एक बार खिलाड़ी महान दर्जा हासिल कर ले तो उसके लिए ऐसा करना मुश्किल हो जाता है। इस पूर्व दिग्गज कप्तान ने कहा, यहां आपको 140 करोड़ लोग फॉलो करते हैं। एक बार खिलाड़ी हिट हुए तो फिर वे व्यक्ति न रहकर महान बन जाते हैं, भगवान बन जाते हैं। महेंद्र सिंह धोनी के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भविष्य को लेकर चल रहे विवाद के संदर्भ में जब वॉ से सवाल पूछा गया तो उन्होंने क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया की संन्यास लेने की नीति के बारे में बात की। उन्होंने कहा, यह दिलचस्प है। ऑस्ट्रेलिया निश्चित रूप से ऐसा करता है। यह मायने नहीं रखता कि आप कौन हो क्योंकि आपको जाना ही होता है।

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