Tuesday , 30 May 2017
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गुजरात की इतिहास-मुम्बई की 42वें खिताब पर नजर

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ranji_trophyइंदौर। भारत ने जब अपनी पहली टेस्ट जीत हासिल नहीं की थी तब गुजरात ने रणजी के फाइनल में जगह बनाई थी। उसके 66 साल बाद जाकर गुजरात अब रणजी फाइनल खेल रहा है। मंगलवार से यहां शुरू होने वाले रणजी फाइनल में गुजरात और इतिहास के बीच 41 बार के चैंपियन मुम्बई की बाधा होगी।
रणजी ट्रॉफी में पहला खिताब जीतने की कवायद में लगे गुजरात को रिकार्ड 41 बार के चैम्पियन मुंबई से कड़ी चुनौती का सामना करना होगा। सेमीफाइनल में मुंबई ने तमिलनाडु को और गुजरात ने झारखंड को हराया था। मुंबई को खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा है लेकिन वह गुजरात की चुनौती को कतई नजरअंदाज नहीं कर सकता।
गुजरात जब 1950-51 में रणजी फाइनल में पहुंचा था तब पॉली उमरीगर उसके कप्तान थे। उसके बाद से गुजरात ने एक लंबा सफर तय किया और 66 साल बाद जाकर फाइनल में जगह बनाई। इसके मुकाबले मुम्बई की टीम 45 बार रणजी के फाइनल में पहुंची और 41 बार खिताब अपने नाम किया। आखिरी बार जब मुम्बई फाइनल में हारी तो वह वर्ष 1990-91 था और मुम्बई के कप्तान दिलीप वेंगसरकर दो रन की हार के बाद रो पड़े थे।
इस बार गुजरात के पास खिताब जीतने का अच्छा मौका है। पिछले कुछ समय में गुजरात की टीम में काफी सुधार हुआ है। टीम ने पिछले सत्र में विजय हजारे ट्राफी जीती जबकि 2012-13 में सैयद मुश्ताक अली चैम्पियन बना। गुजरात की टीम यदि टूर्नामेंट में अब तक के अपने प्रदर्शन को दोहराने में सफल रहती है तो उसके पास गत चैम्पियन मुंबई को एक और खिताब जीतने से रोकने का अच्छा मौका रहेगा।
पार्थिव पटेल की अगुवाई वाली गुजरात की टीम को हालांकि इस मैच में अपने शीर्ष तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह के बिना उतरना होगा जो राष्ट्रीय टीम के साथ व्यस्त हैं। बुमराह ने सेमीफाइनल में झारखण्ड के खिलाफ दूसरी पारी में छह विकेट लेकर मैच विजयी प्रदर्शन किया था। बुमराह ने दूसरी पारी में करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 29 रन देकर छह विकेट चटकाए जिससे टीम पहली पारी में पिछडऩे के बावजूद 123 रन से जीत दर्ज करने में सफल रही।
मुम्बई के लिए सेमीफाइनल में हीरो रहे थे 17 वर्षीय पृथ्वी शॉ जिन्होंने दूसरी पारी में निर्णायक शतक ठोक कर मुम्बई को पांचवे दिन जीत दिलाई थी। मुम्बई की खिताबी उम्मीदों को दारोमदार अखिल हेरवदकर, श्रेयस अय्यर, सूर्यकुमार यादव, कप्तान आदित्य तारे और सिद्धेश लाड पर निर्भर करेगा।
वैसे आंकड़े मुम्बई के पक्ष में हैं जिसने गुजरात के खिलाफ 61 मैचों में से सिर्फ दो मैच गंवाये हैं। लेकिन अब जब गुजरात के पास इतिहास बनाने का अभूतपूर्व मौका है तो गुजरात के खिलाड़ी इसे खोना नहीं चाहेंगे।

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