Wednesday , 11 December 2019
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‘एनआरसी पूरे देश में लागू करेंगे’

राज्यसभा में बोले अमित शाह
केंद्रीय गृहमंत्री ने यह भी कहा कि एनआरसी अलग प्रक्रिया है और नागरिकता संशोधन विधेयक अलग व्यवस्था है
नई दिल्ली (एजेंसी)। राज्यसभा में बुधवार को गृहमंत्री अमित शाह ने एनआरसी मुद्दे पर विपक्ष के आरोपों पर जवाब दिया। उन्होंने धर्म के आधार पर एनआरसी में भेदभाव किए जाने की आशंका को खारिज किया। गृहमंत्री ने कहा कि एनआरसी के आधार पर नागरिकता की पहचान सुनिश्चित की जाएगी और इसे पूरे देश में लागू करेंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म विशेष के लोगों को इसके कारण डरने की जरूरत नहीं है। यह एक प्रक्रिया है जिससे देश के सभी नागरिक एनआरसी लिस्ट में शामिल हो सकें।
‘एनआरसी से किसी को भी डरने की जरूरत नहींÓ
गृहमंत्री ने कहा, एनआरसी में धर्म विशेष के आधार पर भेदभाव नहीं होगा। उन्होंने कहा, एनआरसी में इस तरह का कोई प्रावधान नहीं है जिसके आधार पर कहा जाए कि और धर्म के लोगों को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। सभी नागरिक भले ही उनका धर्म कुछ भी हो, एनआरसी लिस्ट में शामिल हो सकते हैं। एनआरसी अलग प्रक्रिया है और नागरिकता संशोधन विधेयक अलग प्रक्रिया है। इसे एक साथ नहीं रखा जा सकता। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि एनआरसी को पूरे देश में लागू किया जाएगा ताकि भारत के सभी नागरिक एनआरसी लिस्ट में शामिल हो सकें।कांग्रेस सांसद ने शाह के बयान के आधार पर उठाए सवाल
बता दें कि सैयद नासिर हुसैन ने राज्यसभा में कोलकाता में दिए अमित शाह के बयान के आधार पर सवाल पूछा था। कांग्रेस सांसद ने कहा, मैं सिर्फ होम मिनिस्टर से जानना चाहता हूं कि आपने कोलकाता में कहा था कुछ 5-6 धर्म के लोगों का नाम लिया था और मुसलमान का नाम नहीं लिया था। आपने कहा था कि इन सभी धर्म के लोगों को नागरिकता मिलेगी भले ही वह इललीगल तरीके से ही रह रहे हों। इसके कारण मुसलमानों के अंदर असुरक्षा की भावना आई। नागरिकता विधेयक और एनआरसी अलग प्रक्रिया हैं, यह जानता हूं।भेदभाव के शिकार शरणार्थियों के लिए नागरिकता बिल
इसके जवाब में केंद्रीय गृहमंत्री ने कहा, हिंदू, बुद्ध, सिख, जैन, ईसाई, पारसी शरणार्थियों को नागरिकता मिलेगी। इसके लिए सिटिजनशिप अमेंडमेंट बिल अलग से है ताकि इन शरणार्थियों को नागरिकता मिल सके। इन्हें पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धर्म के आधार पर भेदभाव का शिकार होना पड़ा था।शाह के बाद अब हेमंत बिस्व शर्मा बोले’देश के साथ असम में भी नए सिरे से बने एनआरसीÓ
गुवाहाटी/नई दिल्ली (एजेंसी)। गृह मंत्री अमित शाह की ओर से बुधवार को संसद में देश भर में एनआरसी लागू करने के ऐलान के बाद असम सरकार ने राज्य में भी इसे नए सिरे से तैयार कराने की मांग की है।
असम सरकार के मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा ने कहा कि पूरे देश के साथ ही असम में भी नए सिरे से नैशनल सिटिजंस रजिस्टर तैयार किया जाना चाहिए। बता दें कि हेमंत बिस्वा शर्मा शुरूआत से ही असम में 31 अगस्त को जारी हुए एनआरसी के फाइनल ड्राफ्ट में खामियां बताते हुए विरोध करते रहे हैं।
दरअसल असम में भाजपा की ओर से नई एनआरसी तैयार करने की मांग की वजह यह है कि बांग्लादेश से 1971 के बाद आने वाले तमाम हिंदू भी इस लिस्ट से बाहर हैं। ऐसे में भाजपा को एक बड़े वर्ग की नाराजगी का खतरा है। बता दें कि सरकार इसी सत्र में नागरिकता संशोधन विधेयक भी लाने की तैयारी में है, जिसके तहत बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान से आने वाले गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता देने का प्रावधान होगा, जिन्हें भारत में आए 1 से लेकर 6 साल तक हुए हैं।
1971 के बाद आए हिंदू भी हैं एनआरसी से बाहर
दरअसल फाइनल एनआरसी में उन लोगों के नाम शामिल किए गए, जो 25 मार्च 1971 के पहले से असम के नागरिक हैं या उनके पूर्वज राज्य में रहते आए हैं। इस बात का सत्यापन सरकारी दस्तावेजों के जरिए किया गया। ऐसे में वे तमाम हिंदू, जैन, सिख और बौद्ध भी इस लिस्ट से बाहर हो गए हैं, जो कि 1971 के बाद भारत आए हैं। इसके चलते असम में इस मुद्दे को भुनाने वाली भाजपा को झटका लगता दिख रहा है। (शेष पेज 8 पर)

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