Friday , 26 May 2017
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आडवाणी-जोशी समेत 13 नेताओं पर चलेगा मुकदमा

नई दिल्ली। अयोध्या ढांचा विध्वंस मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती सहित 13 नेताओं पर आपराधिक साजिश का मुकदमा चलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस मामले पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। कल्?याण सिंह के खिलाफ फिलहाल कोई केस नहीं चलेगा। कल्याण सिंह गवर्नर के पद पर हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल उन पर मुकदमा चलाने का आदेश नहीं दिया है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मामले से जुड़े दो मुकदमे एक साथ चलाने के निर्देश दिए हैं। इनमें से एक मामला लखनऊ में है, दूसरा रायबरेली में। कोर्ट ने कहा है कि दोनों मामलों की साझा सुनवाई रोजाना लखनऊ की कोर्ट में हो। साथ ही कोर्ट ने दो साल के भीतर दोनों मामले निपटाने का आदेश दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि फैसला आने तक जज का ट्रांसफर नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि रायबरेली से मामला चार हफ्ते के भीतर लखनऊ की कोर्ट में ट्रांसफर हो जाना चाहिए। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि राजस्थान के राज्यपाल कल्याण सिंह पर अभी कोई मामला नहीं चलेगा। दरअसल, कल्याण सिंह को संविधान में मिली छूट का लाभ मिला है। बता दें कि आडवाणी और जोशी सहित भाजपा के 8 नेताओं पर रायबरेली की अदालत मे मुक़दमा चल रहा है, लेकिन उसमें आपराधिक (शेष पृष्ठ ८ पर)
साजिश के आरोप नहीं हैं। लेकिन अब कोर्ट ने आडवाणी समेत 10 लोगों पर आपराधिक मामला चलाने का आदेश दे दिया है। इससे इन आडवाणी और जोशी समेत इन लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 6 दिसंबर 1992 को विवादित ढांचा गिराए जाने के दो मामलों पर ट्रायल चल रहा है। नेताओं को आरोपमुक्त करने के 2001 के फैसले को सीबीआई ने तो सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी थी, लेकिन तीसरे पक्षकार असलम भूरे ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में इसके बाद भूरे की पुनर्विचार और क्यूरेटिव याचिका भी खारिज हो गई थी। इस तरह वह आदेश अंतिम और बाध्यकारी हो चुका है। सीबीआइ ने इस मामले में 20 मई 2010 के आदेश को चुनौती दी है जिसमें हाईकोर्ट ने 2001 के फैसले पर मुहर लगा दी थी। वैसे बता दें कि अयोध्या में विवादित ढांचा ढहने के आरोपों से 17 साल पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, कल्याण सिंह आदि का आरोपमुक्त होना महज किस्मत की ही बात कही जाएगी, क्योंकि जिस कानूनी तकनीकी खामी के आधार पर वे आरोप मुक्त हुए थे वह तो वास्तव में थी ही नहीं। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अभियुक्तों को इस तकनीकी आधार पर आरोपमुक्त किया गया कि रायबरेली के मुकदमें को लखनऊ की अदालत स्थानांरित करते समय हाईकोर्ट से परामर्श नहीं किया गया था लेकिन इसकी जरूरत ही नहीं थी क्योंकि यूपी में संबंधित कानून 1976 में ही संशोधित हो गया है। संशोधन के बाद हाईकोर्ट से परामर्श जरूरी नहीं रह गया है।
बाबरी केस: क्या अब लग जाएगा आडवाणी का राष्ट्रपति बनने के सफर पर ब्रेक?नई दिल्ली। अयोध्या मामले पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि भाजपा के बड़े नेताओं लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती आदि पर आपराधिक साजिश का मामला चलेगा। अब एक सवाल अहम है कि क्या इस फैसले से लालकृष्ण आडवाणी के राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवारी पर विराम लग गया है। कानूनी जानकारों की मानें तो राष्ट्रपति पद की उम्मदवारी में इससे कोई कानूनी अड़चन नहीं है लेकिन मामला अब सिर्फ नैतिकता का है।(भाजपा के पूर्व मंत्री की बेटी ने इंटरनेट पर मचाई सनसनी) संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का कहना है कि जहां तक कानून का सवाल है तो कानून में कहीं भी ऐसा नहीं है कि जिसके खिलाफ कोई क्रिमिनल केस चल रहा हो वह चुनाव नहीं लड़ सकता। वैसे भी संविधान के बेसिक रूल यह है कि हर व्यक्ति कानून के सामने तब तक निर्दोष है जब तक कि वह दोषी करार नहीं दिया जाता। ऐसे में इन नेताओं के खिलाफ जो भी आरोप हैं, अभी ट्रायल का विषय हैं और ट्रायल के बाद यह तय होगा कि ये दोषी हैं या नहीं। ऐसे में कानूनी तौर पर चुनाव लडऩे को लेकर कोई बार नहीं है। इससे पहले एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं एक बैठक में अगले राष्ट्रपति के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता का नाम आगे किया था। सूत्रों के मुताबिक गुजरात के सोमनाथ में हुई एक बैठक के दौरान पीएम मोदी ने आडवाणी का नाम आगे किया। बैठक में पीएम मोदी ने कथित रूप से कहा कि (शेष पृष्ठ ८ पर)
भाजपा के वरिष्ठ नेता आडवाणी के लिए राष्ट्रपति का पद उनकी तरफ से ‘गुरुदक्षिणा’ होगी। इस बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह, केशूभाई पटेल और लालकृष्ण आडवाणी उपस्थित थे। गौरतलब है कि सोमनाथ से ही मोदी का नेशनल करियर शुरु हुआ था। 1990 में आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या की यात्रा शुरू की थी, तब उन्होंने अपने सारथी के रूप में मोदी को प्रोजेक्ट किया था। यहीं से मोदी की नेशनल पॉलिटिक्स में एंट्री हुई थी। मोदी को गुजरात का सीएम बनवाने में भी आडवाणी का अहम रोल था। 2002 के गुजरात दंगों को लेकर मोदी से जब अटल बिहारी वाजपेयी नाराज हुए थे, तो उस वक्त भी आडवाणी ने मोदी का बचाव किया था।आडवाणी का पत्ता अपनों ने काटा, नहीं बन पाएंगे राष्ट्रपति : लालू
पटना लालू प्रसाद ने आज बीजेपी पर जमकर तंज कसा। उन्होंने कहा कि बीजेपी में कहीं से योगी निकल रहे हैं तो कहीं से भोगी। बाबरी मस्जिद केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए लालू ने कि अब आडवाणी के चेले जवाब दें ? लालू ने कहा कि जिन लोगों ने ढांचा गिराया है उनपर केस चलना चाहिए। लाल कृष्ण आडवाणी पर तंज कसते हुए लालू ने कहा कि आडवाणी अब राष्ट्रपति नहीं बन पाएंगे। आडवाणी का लाईन अपनों ने ही काट दिया है। अब तो राष्ट्रपति बनने के लिए आडवाणी के नाम की चर्चा भी नहीं होगी। सबकुछ सोची (शेष पृष्ठ ८ पर)
समझी साजि़श के तहत हुआ है। लालू प्रसाद ने कहा कि मैं साम्प्रदायिकता के खि़लाफ़ लड़ाई लड़ रहा हूं और आखिरी दम तक लडूंगा। उन्होंने कहा, ‘बीजेपी में अटल जी जैसे नेता सक्रिय नहीं है। अटल जी को हमलोग आदर करते हैं। अटल जी बेड पर हैं, इसकी जांच होनी चाहिए। यह गांधी की हत्या करनेवालों की पार्टी है।’ लालू यादव ने कहा कि आडवाणी पर बीजेपी को विश्वास नही है और पीएम मोदी को सीबीआई चला रहे है’। लालू ने कहा, ‘सत्ता के लिए बीजेपी वाले कुछ भी कर सकते हैं, अटल जी को सुला दिया और पंडित दीनदयाल की भी हत्या कर दी गई, सत्ता के लिए बीजेपी वाले कुछ भी कर सकते हैं। वहीं संपत्ति विवाद पर लालू ने कहा, जो सम्प्पति है मेरा वह पब्लिक डोमेन में डाला हुआ है। इसपर जानबूझकर लोग सवाल उठा रहे हैं। हमारा मकान लंदन, दिल्ली, बनारस सब जगह है। सोनू निगम के बयान पर लालू यादव ने कहा कि आरएसएस का पौआ है।
अयोध्या मामले में उमा ने कहा, षड्यंत्र नहीं जो था खुल्लम-खुल्ला था
नई दिल्ली। अयोध्या ढांचा विध्वंस मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती सहित 13 नेताओं पर आपराधिक साजिश का मुकदमा चलेगा। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस मामले पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। कल्याण सिंह के खिलाफ फिलहाल कोई केस नहीं चलेगा। कल्याण सिंह गवर्नर के पद पर हैं, इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल उन पर मुकदमा चलाने का आदेश नहीं दिया है। इस मामले में कैबिनेट मंत्री उमा भारती ने कहा कि षडयंत्र तो तब होता, जब मन में कुछ और होता, वचन में कुछ और होता और कर्म में कुछ और होता। सब-कुछ खुल्लमखुल्ला था। हम राम मंदिर का निर्माण कराना चाहते थे। हमें इसको लेकर हमेशा से गर्व की अनुभव होता है। अयोध्या, गंगा और तिरंगे पर कोई खेद नहीं है। हां, मैं 6 दिसंबर को मौजूद थी, इसमें साजिश की कोई बात नहीं। अयोध्या आंदोलन में मेरी भागीदारी थी, इसमें भी मुझे कोई खेद नहीं है। मैं इसके लिए कोई भी सजा भुगतने को तैयार हूं। इस्तीफे के सवाल पर उमा भारती ने कहा कि सिख दंगे हुए थे, तो सोनिया गांधी को भी आपराधिक षड्यंत्र का केस चलना चाहिए। इसलिए कांग्रेस को इस बारे में बात करने का कोई अधिकार नहीं है। अयोध्या के लिए जान देने के लिए भी तैयार हूं। सीबीआई की दलील
सीबीआई ने आरोपमुक्त हुए 21 लोगों पर साजिश में मुकदमा चलाने की मांग करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने ये कह कर तकनीकी आधार पर आरोप निरस्त किये थे कि एफआइआर संख्या 198 (8 नेताओं का मामला) को रायबरेली से लखनऊ ट्रांसफर करने की अधिसूचना के समय हाईकोर्ट से अनुमति नहीं ली गई। लेकिन हाईकोर्ट ने ये भी कहा था कि प्रथमदृष्टया अभियुक्तों पर मामला बनता है। उसने संयुक्त आरोपपत्र को भी ठीक कहा था। सीबीआई ने कहा कि नेताओं पर रायबरेली में वापस मुकदमा चलने लगा लेकिन वहां उन पर साजिश के आरोप नहीं हैं। परन्तु बाकी 13 तो पूरी तरह छूट गए उन पर कहीं मुकदमा नहीं चल रहा।नेताओं की दलील
नेताओं के वकील ने कहा कि मुकदमा रायबरेली से लखनऊ स्थानांतरित नहीं हो सकता न ही उन पर साजिश का केस चलाया जा सकता है। कोर्ट अनुच्छेद 142 की शक्तियों का इस्तेमाल करके भी ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि इससे उनके मौलिक अधिकारों का हनन होता है। अगर मुकदमा लखनऊ स्थानांतरित हुआ तो रोजाना सुनवाई के बावजूद 2 साल मे नहीं निपटेगा क्योंकि नये सिरे से सुनवाई होगी और 800 गवाहों से जिरह होगी। सीबीआई के पास अगर साजिश के सबूत हैं तो वो रायबरेली में पूरक आरोपपत्र दाखिल कर सकती है। साथ ही कहा था कि असलम भूरे केस में कोर्ट का फैसला अंतिम हो चुका है जिसमें कोर्ट ने रायबरेली में मुकदमा चलाने की बात कही है। ये फैसला सभी पर बाध्यकारी है।

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